बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह : शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, समाज निर्माण है – राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल

Shivansh Jha
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झांसी । बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आज शिक्षा, शोध, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की गूंज सुनाई दी। समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल और डीआरडीओ की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रिका कौशिक ने विद्यार्थियों को जीवन के नए चरण की बधाई देते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया।

 राज्यपाल आनंदीबेन पटेल : “शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री नहीं, संवेदनशील नागरिक बनाना है”

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल – विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक और समाज सुधारक तैयार करने की प्रयोगशाला है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक और समाज सुधारक तैयार करने की प्रयोगशाला है। उन्होंने कहा –

“शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि ऐसा व्यक्ति बनना है जो समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी हो। आज हमें ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों से भी परिपूर्ण हों।”

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को सिर्फ परीक्षाएं कराने और अंक पत्र बांटने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को जीवन मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना चाहिए

। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई जा रही योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को इन अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

  डॉ. चंद्रिका कौशिक (वैज्ञानिक, DRDO) : “राष्ट्र का भविष्य युवाओं की प्रगति पर निर्भर है”

मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रिका कौशिक ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि भारत की आधी से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की है, इसलिए राष्ट्र की तरक्की पूरी तरह युवाओं के हाथ में है।

उन्होंने कहा – “छात्रों की प्रगति से ही राष्ट्र और विश्व का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित होगा। युवाओं को चाहिए कि वे तकनीकी बदलाव और शोध की रीढ़ बनें और देश को आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में योगदान दें।”

शिक्षा जगत में क्रांतिकारी बदलाव

डॉ. कौशिक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और विदेशी विश्वविद्यालयों से एमओयू जैसी पहलों को शिक्षा जगत में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से आने वाले समय में उद्योगोन्मुखी स्नातक तैयार होंगे और विश्वविद्यालय-उद्योग साझेदारी और मजबूत होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि रिसर्च और इनोवेशन से ही स्टार्टअप इंडिया आंदोलन को गति मिली है और भारत आज विश्व की कई समस्याओं का समाधान देने में सक्षम है।

क्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

डीआरडीओ वैज्ञानिक ने भारत की सैन्य उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश आज रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। उन्होंने बताया कि –

  • भारत ने तेजस एयरक्राफ्ट, अर्जुन टैंक, अग्नि मिसाइल, सोनार और टॉरपीडो सिस्टम जैसे हथियारों के जरिए अपनी वैश्विक पहचान बनाई है।
  • अब भारत स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर भी बना रहा है।
  • वर्ष 2029 तक भारत का रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने और रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में महारत हासिल करनी होगी।

 युवाओं से आह्वान

डॉ. कौशिक ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि चुनौतियों से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें अवसर में बदलना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा –

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का जो मंत्र दिया है, उसके बल पर भारत ने बीते दस वर्षों में रक्षा क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। अब जिम्मेदारी युवाओं की है कि वे इस गति को और आगे बढ़ाएं।”

 कुलपति प्रो. मुकुल पांडेय : “बुंदेलखंड विश्वविद्यालय बनेगा शोध और नवाचार का केंद्र”

कुलपति प्रो. मुकुल पांडेय – बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को हाल ही में NAAC A++ ग्रेडिंग और NIRF रैंकिंग में सम्मान मिला है |

समारोह में कुलपति प्रो. मुकुल पांडेय ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को हाल ही में NAAC A++ ग्रेडिंग और NIRF रैंकिंग में सम्मान मिला है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित DST टेक हब, इनोवेशन हब और इनक्यूबेशन सेंटर शोध और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर शोध और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।

कार्यक्रम का समापन

समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। हज़ारों की संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और प्राध्यापकों ने दीक्षांत समारोह की ऐतिहासिक घड़ी को साझा किया। मंच पर राज्यपाल, वैज्ञानिक और कुलपति के प्रेरणादायक विचारों ने इस आयोजन को शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के महाकुंभ में बदल दिया।

      

निष्कर्ष :

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर भारत, शिक्षा में नवाचार और समाज सेवा के मूल्यों से जोड़ने का संकल्प था। राज्यपाल, वैज्ञानिक और कुलपति – तीनों के संदेशों ने विद्यार्थियों के लिए भविष्य का रोडमैप स्पष्ट किया कि उन्हें केवल करियर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की राह पर चलना है।

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