राम जन्म कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु, कवि सम्मेलन ने जगाई सांस्कृतिक चेतना

Shivansh Jha
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झांसी | सखी हनुमान मंदिर में चल रहे पंच शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार का दिन धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर वेद मंत्रों की पवित्र ध्वनि, यज्ञ की दिव्य आहुति और श्रद्धालुओं की गहन आस्था से सराबोर रहा। दिन में भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, वहीं रात्रि में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने पूरे वातावरण को साहित्यिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।

यह भव्य आयोजन सखी हनुमान मंदिर पीठाधीश्वर महंत पूज्य नागा मोहन दास जी महाराज के सानिध्य तथा संयोजक अर्पित दास जी महाराज के निर्देशन में अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।

वेद मंत्रों और यज्ञ से सजी आध्यात्मिक शुरुआत
प्रातःकाल मंदिर परिसर में वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों एवं यज्ञ का शुभारंभ किया गया। वेद मंत्रों की गूंज और हवन की पवित्र आहुति से वातावरण आध्यात्मिक आभा से परिपूर्ण हो उठा। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व कल्याण की कामना की।

इसके उपरांत भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग की कथा का अत्यंत भावपूर्ण वाचन हुआ। कथा में भगवान श्रीराम के दिव्य अवतरण, धर्म स्थापना, मर्यादा, आदर्श जीवन और भक्ति के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया। जैसे ही कथा में राम जन्म का पावन प्रसंग आया, मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उस दिव्य क्षण का स्वागत किया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं की आंखें भक्ति से नम और हृदय भावनाओं से पुलकित नजर आए।

दिनभर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, व्यवस्थाएं रहीं सुचारु
पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दर्शन, पूजन, कथा श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों में हजारों की संख्या में भक्तजन शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा बैठने, प्रसाद वितरण, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, धर्माचार्य, यजमान एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से मण्डल धर्माचार्य श्री लल्लन महाराज, श्री जयदेव पुरोहित, कमल लिराम जन्म कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु, कवि सम्मेलन ने जगाई सांस्कृतिक चेतना

झांसी, संवाददाता।
सखी हनुमान मंदिर में चल रहे पंच शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार का दिन धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर वेद मंत्रों की पवित्र ध्वनि, यज्ञ की दिव्य आहुति और श्रद्धालुओं की गहन आस्था से सराबोर रहा। दिन में भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया, वहीं रात्रि में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने पूरे वातावरण को साहित्यिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।

यह भव्य आयोजन सखी हनुमान मंदिर पीठाधीश्वर महंत पूज्य नागा मोहन दास जी महाराज के सानिध्य तथा संयोजक अर्पित दास जी महाराज के निर्देशन में अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।

वेद मंत्रों और यज्ञ से सजी आध्यात्मिक शुरुआत
प्रातःकाल मंदिर परिसर में वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों एवं यज्ञ का शुभारंभ किया गया। वेद मंत्रों की गूंज और हवन की पवित्र आहुति से वातावरण आध्यात्मिक आभा से परिपूर्ण हो उठा। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व कल्याण की कामना की।

इसके उपरांत भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग की कथा का अत्यंत भावपूर्ण वाचन हुआ। कथा में भगवान श्रीराम के दिव्य अवतरण, धर्म स्थापना, मर्यादा, आदर्श जीवन और भक्ति के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया। जैसे ही कथा में राम जन्म का पावन प्रसंग आया, मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उस दिव्य क्षण का स्वागत किया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं की आंखें भक्ति से नम और हृदय भावनाओं से पुलकित नजर आए।

दिनभर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, व्यवस्थाएं रहीं सुचारु
पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दर्शन, पूजन, कथा श्रवण और धार्मिक अनुष्ठानों में हजारों की संख्या में भक्तजन शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा बैठने, प्रसाद वितरण, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, धर्माचार्य, यजमान एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से मण्डल धर्माचार्य श्री लल्लन महाराज, श्री जयदेव पुरोहित, कमल लिखदारी, संत राम पेंटर सहित कई गणमान्य लोगों ने सहभागिता निभाई।

संयोजक अर्पित दास जी महाराज ने बताया कि पंच शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह और सहयोग उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव है।

कवि सम्मेलन में बही साहित्य और राष्ट्रभावना की धारा
रात्रिकालीन कार्यक्रम में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने महोत्सव में एक नई ऊर्जा का संचार किया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी ओज, वीर, हास्य, श्रृंगार और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

कवि सम्मेलन में जॉनी वैरागी, राव अजातशत्रु, महेंद्र नागपुर, नेहा शर्मा ‘नमन’, पंकज पंडित, अभिजीत मिश्रा, राजपाल सिंह, हितेश विश्व, सुमित ओरछा सहित कई कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। उनकी रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्ण स्वागत किया।

इस प्रकार पंच शताब्दी महोत्सव का यह दिवस भक्ति, आध्यात्म और साहित्य की त्रिवेणी के रूप में संपन्न हुआ, जिसने श्रद्धालुओं और श्रोताओं के मन में गहरी और अविस्मरणीय छाप छोड़ी।खदारी, संत राम पेंटर सहित कई गणमान्य लोगों ने सहभागिता निभाई।

संयोजक अर्पित दास जी महाराज ने बताया कि पंच शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह और सहयोग उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव है।

कवि सम्मेलन में बही साहित्य और राष्ट्रभावना की धारा
रात्रिकालीन कार्यक्रम में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने महोत्सव में एक नई ऊर्जा का संचार किया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी ओज, वीर, हास्य, श्रृंगार और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

कवि सम्मेलन में जॉनी वैरागी, राव अजातशत्रु, महेंद्र नागपुर, नेहा शर्मा ‘नमन’, पंकज पंडित, अभिजीत मिश्रा, राजपाल सिंह, हितेश विश्व, सुमित ओरछा सहित कई कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। उनकी रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्ण स्वागत किया।

इस प्रकार पंच शताब्दी महोत्सव का यह दिवस भक्ति, आध्यात्म और साहित्य की त्रिवेणी के रूप में संपन्न हुआ, जिसने श्रद्धालुओं और श्रोताओं के मन में गहरी और अविस्मरणीय छाप छोड़ी।

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