संभल के बाद अब फतेहपुर में मंदिर-मस्जिद विवाद, ईदगाह में बने मकबरे पर भगवा लहराने से बवाल
उत्तर प्रदेश में संभल के बाद अब फतेहपुर में भी मंदिर-मस्जिद विवाद ने तूल पकड़ लिया है। सोमवार सुबह करीब 10 बजे बजरंग दल और हिंदू महासभा समेत कई संगठनों के करीब 2 हजार कार्यकर्ता ईदगाह स्थित एक मकबरे पर पहुंचे। पुलिस ने पहले ही चारों ओर बैरिकेडिंग कर रखी थी, लेकिन लाठी-डंडों से लैस कार्यकर्ताओं ने मकबरे को मंदिर बताते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसी दौरान कुछ युवकों ने छत पर चढ़कर भगवा झंडा फहरा दिया।
मकबरे पर भगवा और पूजा-पाठ होते देख मुस्लिम समुदाय के करीब डेढ़ हजार लोग ईदगाह पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने लाठियां बरसाईं और भीड़ को खदेड़ने के लिए 10 थानों की फोर्स तैनात कर दी। तनाव के बीच हिंदू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता डाक बंगला चौराहे पर बैठ गए और सड़क जाम कर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।
6 जिलों के एएसपी मौके पर तैनात
बवाल की सूचना मिलते ही एडीजी जोन प्रयागराज संजीव गुप्ता मौके पर पहुंचे और फ्लैग मार्च किया। हालात पर कड़ी नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। एडीजी के आदेश पर चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, कौशांबी, प्रतापगढ़ और कानपुर देहात से एएसपी को तुरंत फतेहपुर भेजा गया है।
एसपी अनूप सिंह: अराजक तत्वों को खदेड़ा, भगवा झंडा हटाया गया
एसपी अनूप सिंह ने बताया कि विवाद की आशंका को देखते हुए पहले से फोर्स तैनात थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ अराजक तत्व मकबरे के अंदर पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें तुरंत खदेड़ दिया। फिलहाल मौके पर केवल पुलिसकर्मी तैनात हैं और सभी लोगों को वहां से वापस भेज दिया गया है। जो झंडा लगाया गया था, उसे हटा दिया गया है।
शहर काजी की अपील: “शांति बनाए रखें, प्रशासन अपना काम करेगा”
शहर काजी सईदुल इस्लाम अब्दुल्ला ने मुस्लिम समुदाय से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने शहर का अमन-चैन खराब करने के लिए हुड़दंग किया है, लेकिन हमें शांत रहना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रशासन पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करेगा।
फतेहपुर में विवाद की पृष्ठभूमि: हिंदू संगठन ने पहले ही कर दिया था पूजा का ऐलान
फतेहपुर शहर के आबूनगर इलाके में स्थित ईदगाह में नवाब अब्दुल समद का करीब 200 साल पुराना मकबरा है। स्थानीय हिंदू संगठनों का दावा है कि यह मकबरा नहीं, बल्कि ठाकुर जी का मंदिर है। चार दिन पहले, शुक्रवार को मठ मंदिर संघर्ष समिति ने डीएम रवींद्र सिंह को ज्ञापन देकर यहां से “कब्जा हटाने” और जन्माष्टमी मनाने की घोषणा की थी।इसी घोषणा के मद्देनजर रविवार को डीएम और एसपी अनुज सिंह ने स्थल का निरीक्षण भी किया था, और सोमवार सुबह से मकबरे के सामने पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। हालांकि, सुबह करीब 10 बजे बड़ी संख्या में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता वहां पहुंच गए, जिससे हालात अचानक बिगड़ गए। मंदिर का दावा अब पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आया है।




