
झाँसी। विजयादशमी पर्व पर गुरुद्वारा नगर मोहल्ला में इस बार दशहरा उत्सव कुछ अलग ही रंग में नज़र आया। जहां पारंपरिक रूप से रावण का पुतला बनाने और दहन की जिम्मेदारी प्रायः पुरुषों द्वारा निभाई जाती है, वहीं इस बार मोहल्ले की बालिकाओं ने कमान संभाली और शानदार उदाहरण पेश किया। उन्होंने साबित कर दिया कि आज की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं — चाहे बात कला की हो, आयोजन की या नेतृत्व की।
इस विशेष आयोजन में इति झा और अदिति शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाते हुए रावण का पुतला तैयार किया। कई दिनों की मेहनत और रचनात्मक सोच से बना यह पुतला कार्यक्रम का आकर्षण केंद्र रहा। इस पहल में अन्य बालिकाओं — अन्वी शर्मा, तनु, तनवी, स्नेहा शर्मा — ने भी सक्रिय योगदान दिया। शाम 8 बजे मोहल्ले में रावण दहन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक लोग शामिल हुए और कार्यक्रम को सफल बनाया।
रावण दहन के दौरान शिवांश झा, इशांत शर्मा और रवि कांत शर्मा सहित बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। जैसे ही रावण का पुतला जलाया गया, आसमान में जयकारों की गूंज फैल गई — “जय श्रीराम” के नारों के साथ सभी ने बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया।
स्थानीय लोगों ने बालिकाओं की इस पहल की सराहना की और कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक परंपरा का निर्वाह नहीं था, बल्कि समाज को एक सशक्त संदेश भी दे गया — कि लड़कियां न केवल घर-परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाल सकती हैं, बल्कि सामाजिक आयोजनों में नेतृत्व कर समाज को दिशा भी दे सकती हैं।
मोहल्ले की महिलाओं और अभिभावकों ने भी गर्व महसूस करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से न केवल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण भी स्थापित होता है।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि समय बदल रहा है — अब लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, परंपराएं भी नए रूप में ढल रही हैं, और समाज में समान भागीदारी की एक नई मिसाल कायम हो रही है।
