झाँसी
। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) द्वारा इंजीनियर्स डे के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भारत के महान अभियंता एवं भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि दी गई और नवाचार तथा राष्ट्र निर्माण में अभियंताओं की भूमिका पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. मुकेश पांडे ने इंजीनियरों को “समाज की रीढ़” बताते हुए सर एम. विश्वेश्वरैया के कथन “शिक्षा ही देश की प्रगति का मूल मंत्र है” को याद किया। उन्होंने भारत की तकनीकी उपलब्धियों जैसे यूपीआई और मिसाइल तकनीक का उल्लेख करते हुए छात्रों और शिक्षकों से निरंतर नवाचार और कौशल उन्नयन का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. विक्रम (एग्रो विज़न प्रमुख) ने “विकसित भारत” के निर्माण में इंजीनियरों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनने की प्रेरणा दी और भगवान विश्वकर्मा को विश्व का प्रथम अभियंता बताया।
इस अवसर पर IET निदेशक प्रो. डी.के. भट्ट ने छात्रों के उत्साह की सराहना की और कुलपति की इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि को विश्वविद्यालय समुदाय के लिए प्रेरक बताया। डीन प्रो. एम.एम. सिंह ने कहा कि ईमानदारी, समयपालन और कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त की जा सकती है। वहीं स्टेट ऑफिसर प्रो. सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि इंजीनियरिंग का असली उद्देश्य नवाचार और विकास के माध्यम से जीवन को आसान बनाना है।
शैक्षणिक समन्वयक इंजीनियर ब्रजेंद्र शुक्ला ने बताया कि कैंपस के लगभग 70 प्रतिशत छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमाण है। प्रो. एस.पी. सिंह ने तकनीकी नवाचार को समाज की बड़ी क्रांति बताया, जबकि प्रो. अनुपम व्यास ने इंजीनियर्स डे को ज्ञान और कौशल वृद्धि का महत्वपूर्ण अवसर कहा।
कार्यक्रम के दौरान “इंटरनल हैकाथॉन फॉर एसआईएच–2025” पोस्टर का शुभारंभ किया गया। साथ ही बी.टेक छात्रों को शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार और प्रतियोगिता विजेताओं को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को और आकर्षक बना दिया।
समारोह का शुभारंभ प्रो. ब्रजेंद्र शुक्ला के स्वागत भाषण से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन इंजीनियर शशिकांत वर्मा ने प्रस्तुत किया और मंच संचालन प्रो. अनुपम व्यास ने किया। इस अवसर पर डॉ. शुभांगी निगम, इंजीनियर नेहा जैन, इंजीनियर प्रियंका पांडे, इंजीनियर महेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. जितेन्द्र वर्मा, इंजीनियर आलोक वर्मा सहित सभी संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
सर एम. विश्वेश्वरैया की स्मृति को समर्पित यह आयोजन न केवल छात्रों को तकनीकी नवाचार और उद्यमिता की ओर प्रेरित करता है, बल्कि विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा और भविष्य के अभियंताओं को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
