महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के संवाहक: प्रो. पुनीत बिसारिया

वाल्मीकि का जीवन छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत: डॉ. नवीन चंद्र पटेल

Shivansh Jha
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Highlights
  • भास्कर जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में विद्यार्थियों ने वाल्मीकि जी के जीवन और साहित्य पर अपने विचार साझा किए।
  • प्रो. पुनीत बिसारिया ने कहा कि रामायण केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का संवाहक महाकाव्य है।
  • डॉ. नवीन चंद्र पटेल ने बताया कि वाल्मीकि की रचनाओं में समाज के हर वर्ग के लिए समानता और सहानुभूति का संदेश निहित है।
  • पत्रकारिता विभाग के कर्मचारी वीरेंद्र अहिरवार का सम्मान किया गया; छात्रों ने वाल्मीकि जी के आदर्शों से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
कला संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भास्कर जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में बुधवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और भारतीय संस्कृति में उनके आदर्शों की प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि, कला संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीत बिसारिया ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति के प्रथम कवि होने के साथ-साथ मर्यादा, नीति और सत्य के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों का संवाहक महाकाव्य है, जो जीवन के हर क्षेत्र को दिशा प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे वाल्मीकि जी के आदर्शों को जीवन में उतारें और समाज में सकारात्मक सोच और नैतिकता का प्रसार करें।

डॉ. नवीन चंद्र पटेल, सहायक आचार्य हिंदी विभाग

विशिष्ट अतिथि डॉ. नवीन चंद्र पटेल, सहायक आचार्य हिंदी विभाग ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं में समाज के वंचित और हाशिए पर ख

ड़े लोगों के लिए समानता, सहानुभूति और न्याय का सशक्त संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम है, और वाल्मीकि की परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उनके समय में थी।

 

 

 

इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग के कर्मचारी वीरेंद्र अहिरवार को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. कौशल त्रिपाठी, समन्वयक जनसंचार विभाग ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि संवाद और विमर्श भारतीय संस्कृति की आत्मा है। वाल्मीकि जयंती जैसे अवसर न केवल सांस्कृतिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों में समाज और परंपरा के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ाते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा महर्षि वाल्मीकि के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। संचालन बीए प्रथम वर्ष की छात्रा अनायशा ने किया, जबकि रोशनी याद ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन, उनके साहित्यिक योगदान और सामाजिक समरसता पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्य, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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