बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कौशल विकास पर प्रेरणादायक कार्यशाला

Shivansh Jha
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झाँसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्राणिविज्ञान विभाग में छात्रों के कौशल विकास पर केंद्रित एक प्रेरणादायक कार्यशाला का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. आदित्य नारायण के निर्देशन में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को डिग्री के साथ-साथ रोजगारपरक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करना था।

समारोह में कुलसचिव श्री राज बहादुर ने कहा कि छात्रों की असली पहचान उनके कौशल से होती है, न कि केवल डिग्री से। उन्होंने कहा कि कौशल वह दीपक है जो राह दिखाता है और आत्मनिर्भरता तूफानों से लड़ने की शक्ति देती है। उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा—“एड़ियाँ जब तक घिसेंगी, पानी निकल ही आएगा,” यानी निरंतर मेहनत से ही सपनों की प्यास बुझती है। साथ ही उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि—“एक पत्थर तबीयत से उछालो, आसमान में सुराख हो जाएगा,” अर्थात साहस और सतत प्रयास से असंभव भी संभव हो सकता है।

डीन विज्ञान संकाय प्रो. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि हर महान आविष्कार की शुरुआत एक साधारण सवाल से होती है। उन्होंने विज्ञान को केवल विषय ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला बताया। मुख्य अतिथि श्री अनिल कुमार राव (सहायक निदेशक, रेशम बोर्ड उत्तर प्रदेश सरकार) ने रेशम उद्योग में स्टार्टअप और स्वरोजगार की संभावनाओं को रेखांकित किया और छात्रों से स्थानीय संसाधनों से वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने आत्मविश्वास, अभ्यास और सकारात्मक सोच को सफलता की कुंजी बताते हुए जंतु विज्ञान को अनुसंधान और जैव-प्रौद्योगिकी से जोड़ने की बात कही। अतिथि वक्ता डॉ. जे. पी. त्रिपाठी ने वनस्पति विज्ञान को विज्ञान, नवाचार और आजीविका का संगम बताया और छात्रों को हर्बल उत्पाद तथा नर्सरी प्रबंधन में स्टार्टअप हेतु प्रेरित किया। विशेष वक्ता डॉ. पी. सी. सिंगल ने कहा कि रसायन विज्ञान नवाचार और निर्माण की क्षमता देता है तथा दवाइयाँ, पेंट, पॉलिमर और खाद्य पदार्थ निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. ब्रजेश श्रीवास्तव ने मलेरिया की रोकथाम में जनजागरूकता, तकनीकी दक्षता और प्रबंधन कौशल की आवश्यकता पर जोर दिया और स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर अवसर बताए। वहीं, स्थानीय विशेषज्ञ डॉ. सी. एल. बघेल ने जीवविज्ञान में कौशल विकास को रोग पहचान, रोकथाम तकनीक और शोध दक्षता से जोड़ा और छात्रों को फाइलेरिया जैसे रोगों पर शोध के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में डॉ. कौशल त्रिपाठी, डॉ. सचिन उपाध्याय, डॉ. रघुवीर इरछारिया, डॉ. नन्दलाल सिंह, डॉ. राजकुमार वर्मा, डॉ. सिमरन श्रीवास्तव, एड. महेंद्र कुमार, डॉ. रवि कुमार, डॉ. पूनम मेह्लोत्रा सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे। अंत में आभार व्यक्त करते हुए डॉ. सत्यवीर सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल और आत्मनिर्भरता की राह पर भी अग्रसर करते हैं।

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