झांसी में पद्मश्री मालिनी अवस्थी का उद्बोधन: “लोकगीतों पर हो रिसर्च, यही हमारी असली पहचान”

मैथिलीशरण गुप्त जयंती पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

Harsh vishwakarma
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झांसी | बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में सोमवार को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर एक भव्य साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शोभा बनीं प्रसिद्ध लोकगायिका और पद्मश्री सम्मानित मालिनी अवस्थी, जिन्होंने अपने ओजस्वी विचारों और लोकगीतों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रकवि की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई, जिसके बाद मालिनी अवस्थी ने अपनी नवीनतम पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ का विमोचन किया। यह पुस्तक उनके जीवन की अनुभूतियों, लोककथाओं और संगीत यात्रा की अभिव्यक्ति है, जिसमें कुल 27 अध्याय शामिल हैं।

मालिनी अवस्थी ने कहा, “बुंदेलखंड मेरे लिए नया नहीं है। यह धरती, इसकी बोली और बारिश में भीगी हरियाली मेरे हृदय में बसती है। लोकगीत केवल गायन नहीं, समाज का संवेदनशील दस्तावेज हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे इन पर रिसर्च करें।”

कार्यक्रम में शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी लोकगीतों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। संचालन कर रहे शोधार्थी शाश्वत सिंह ने मालिनी अवस्थी से अवधि और लोकभाषा के सांस्कृतिक पक्ष पर संवाद किया।

कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा, “मालिनी अवस्थी जैसी लोकमूल्य आधारित विभूतियों का आगमन विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। इससे युवा वर्ग को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।”

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की आगामी लोकसंस्कृति केंद्रित रिसर्च योजनाओं की घोषणा की गई और धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।

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