झांसी पॉक्सो केस में बड़ा फैसला: किशोरी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पिता और दादा को 20-20 साल की सजा

अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की कोर्ट ने सुनाया फैसला, एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया

Harsh vishwakarma
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झांसी। झांसी की अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी पाए गए पिता और दादा को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला नवंबर 2020 में एरच थाने में दर्ज मुकदमे में दिया गया है।

यह मामला एक 16 वर्षीय किशोरी की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसे पड़ोसी युवक द्वारा लगातार छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों से परेशान होकर जान देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। आरोपी आकाश के पिता अमर सिंह और दादा कमल सिंह ने भी पीड़िता के परिवार को धमकाया और अपमानित किया था।

घटना का पूरा विवरण:
7 नवंबर 2020 को पीड़िता के पिता ने एरच थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि पड़ोसी युवक आकाश उनकी बेटी को स्कूल आते-जाते छेड़ता और परेशान करता था। जब शिकायत करने वे आरोपी के पिता अमर सिंह के पास गए, तो अमर सिंह और उसके पिता कमल सिंह ने उन्हें भला-बुरा कहकर भगा दिया।

इसके बाद आरोपी आकाश ने किशोरी को और ज्यादा परेशान करना शुरू कर दिया। 6 नवंबर 2020 को तीनों आरोपी किशोरी के घर पहुंचे और परिवार को धमकाया कि या तो लड़की की शादी करा दो या यह मर जाए। इस अपमान और धमकियों से टूटकर किशोरी ने घरेलू जहर खा लिया।

परिजन जब कमरे में पहुंचे तो किशोरी उल्टियां कर रही थी। उसने अपने माता-पिता को पूरी बात बताई और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस को किशोरी के कपड़ों से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने तीनों आरोपियों के अत्याचार और धमकियों का जिक्र किया था।

जांच और सजा:
पुलिस ने आरोपी आकाश, उसके पिता अमर सिंह और दादा कमल सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। चूंकि आकाश उस समय नाबालिग था, इसलिए उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में भेजा गया, जबकि अमर सिंह और कमल सिंह को जेल भेजा गया।

मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) विजय सिंह कुशवाहा ने की। उन्होंने ठोस साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत दलीलें रखीं। इसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल की सजा और 1-1 लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि जुर्माना अदा नहीं किया गया, तो दोनों को अतिरिक्त दो साल का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही अर्थदंड की आधी रकम (एक लाख रुपए) मृतक किशोरी के माता-पिता को दिए जाने का निर्देश दिया गया है।

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