झांसी। चर्चित अंशुल यादव हत्याकांड में शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुना दिया। तीन आरोपियों — सुनील यादव, अभिषेक यादव और नीलू उर्फ धर्मसिंह यादव को अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार यादव की अदालत ने दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
तीनों पर ₹5.25 लाख का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसमें से 75 प्रतिशत राशि मृतक की मां को दी जाएगी। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक को एक-एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
क्या था मामला:
30 नवंबर 2023 को 19 वर्षीय अंशुल यादव, निवासी उजयान गांव (थाना बरुआसागर), अपनी बहन को झांसी स्टेशन छोड़कर बाइक से लौट रहा था। रास्ते में कार सवार तीन युवकों ने पीपा पुल पर बाइक को टक्कर मार दी, फिर अंशुल को कार में डालकर ले गए। बाद में उसकी हत्या कर लाश को 28 किलोमीटर दूर बेतवा नदी में फेंक दिया गया।
अगले दिन नदी में अंशुल की बाइक और चप्पल मिलने के बाद मामला हत्या का निकला। पुलिस ने जांच में पच्चरगढ़ निवासी सुनील यादव, सरसई के अभिषेक यादव और बैरीसालपुरा के नीलू उर्फ धर्मसिंह यादव को गिरफ्तार किया था।
क्यों की गई थी हत्या:
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सुनील यादव हाईवे पर ढाबा चलाता था, जहां कुछ समय पहले अंशुल का उससे झगड़ा हुआ था। इसी रंजिश में तीनों ने मिलकर अंशुल की पूर्व नियोजित तरीके से हत्या की।
महत्वपूर्ण सबूत:
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह गौर के अनुसार, सजा दिलाने में दो सबूत निर्णायक रहे —
-
अंशुल अपने जीजा प्रवीन से फोन पर बात कर रहा था जब झगड़ा हुआ, और उसने तीनों आरोपियों के नाम बताए थे।
-
पीपा पुल पर कार के टूटे पार्ट्स मिले थे, जो बाद में बरामद की गई कार से मेल खाते पाए गए।
साथ ही सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान ने भी आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश किए।
पीड़ित परिवार की स्थिति:
अंशुल अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता खेती और निजी कार्य करते हैं। परिवार ने कोर्ट के फैसले को “देर से मिला, पर न्याय मिला” कहा।
