छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)।
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत का भयावह मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि “कोल्ड्रिफ कफ सिरप” में जहरीला रसायन डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मौजूद था। इस घटना के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी दवा कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे संशोधित दवा मानकों का पालन करें, अन्यथा उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
हाल के दिनों में मध्य प्रदेश और राजस्थान में ऐसे मामलों से 14 बच्चों की मौत हो चुकी है। मंत्रालय ने रविवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर यह कदम उठाया।
बैठक का आयोजन तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया था, जिसमें “कोल्ड्रिफ कफ सिरप” में DEG की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में भारत में कफ सिरप के सेवन से करीब 300 बच्चों की मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने फिलहाल “कोल्ड्रिफ सिरप” पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
कफ सिरप में जहरीला तत्व कैसे पहुंचता है?
कुछ फार्मा कंपनियां कफ सिरप में सॉल्वेंट के रूप में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) का उपयोग करती हैं। ये दोनों रसायन बेहद जहरीले होते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सिरप में केवल 1–2 मिलीलीटर DEG या EG की मौजूदगी भी बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है।
इसके सेवन से किडनी फेलियर, तंत्रिका तंत्र पर असर, बेहोशी और कोमा जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
DEG क्या है और इसका उपयोग कहाँ होता है?
डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) एक बेगंध और रंगहीन तरल रसायन है, जो सामान्यतः एंटीफ्रीज, ब्रेक फ्लूइड, पेंट, कॉस्मेटिक्स, और प्लास्टिक उत्पादों में उपयोग किया जाता है।
दवाओं में इसका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
अमेरिका, बांग्लादेश, पनामा और नाइजीरिया जैसे देशों में DEG मिश्रण के कारण पहले भी सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं।
क्यों मिलाया जाता है यह रसायन?
कुछ कंपनियां लागत कम करने के लिए महंगे सॉल्वेंट जैसे ग्लिसरीन या प्रोपिलीन ग्लाइकॉल की जगह DEG या EG का उपयोग करती हैं।
जहां ग्लिसरीन की लागत करीब ₹500–₹600 प्रति लीटर होती है, वहीं DEG/EG मात्र ₹50–₹100 प्रति लीटर में उपलब्ध होते हैं।
इससे कंपनियों को प्रति लीटर ₹400–₹450 की बचत होती है — लेकिन यह बचत मासूम ज़िंदगियों की कीमत पर होती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि
- DEG और EG से संबंधित सभी दवाओं की सख्त जांच की जाए,
- दोषी कंपनियों के खिलाफ लाइसेंस रद्दीकरण की कार्यवाही की जाए,
- और बच्चों के लिए उपयोग की जाने वाली सिरपों पर विशेष निगरानी रखी जाए।
संपादकीय टिप्पणी:
कफ सिरप में DEG जैसी घातक रासायनिक मिलावट भारतीय दवा उद्योग की नैतिकता पर गंभीर सवाल उठाती है। केंद्र सरकार की सख्ती आवश्यक है, लेकिन ग्रामीण और छोटे बाजारों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए बिना ऐसी घटनाओं को रोकना कठिन होगा।
